China’s new AI dam: सितंबर 2025 चीन ने हाल ही में एक नया बांध बनाया है जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोट और डिजिटल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हुआ है। यह प्रोजेक्ट दिखाता है कि आधुनिक तकनीक से बड़े-बड़े बांध कैसे अलग और सुरक्षित तरीके से बनाए जा सकते हैं।
शिनजियांग का डैशीशिया बांध डैशीशिया वाटर कंट्रोल प्रोजेक्ट (Dashixia Water Control Project) जो शिनजियांग, उत्तर-पश्चिम चीन में बना है।
यह बांध 247 मीटर ऊँचा है (लगभग 80 मंज़िल जितना)। सितंबर 2025 में इसमें पानी भरना शुरू हो गया। इसे दुनिया का सबसे ऊँचा CFRD (कंक्रीट-फेस्ड रॉकफिल डैम) कहा जा रहा है, जिसे AI और स्मार्ट मशीनों की मदद से बनाया गया है।
इससे पहले, चीन ने यांगकू डैम (Yangqu Dam) पर भी टेस्ट किया था, जहाँ रोबोट और बिना ड्राइवर वाले ट्रक परत-दर-परत बांध बनाते थे, जैसे “3D प्रिंटिंग” का बड़ा रूप।
कैसे बनी यह तकनीकी डैम
चीन ने इसे पुरानी पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि इन तकनीकों से बनाया:
- डिजिटल ट्विन (Digital Twin): बांध का वर्चुअल मॉडल, जिस पर पहले सारे काम की जाँच की गई।
- AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता): AI ने मशीनों को निर्देश दिए, काम का प्लान बनाया और ग़लतियाँ पकड़ीं।

रोबोट और ड्राइवरलेस मशीनें: ट्रक, बुलडोज़र और रोलर बिना ड्राइवर के चले।
- लेयर-बाय-लेयर कंस्ट्रक्शन: बांध को परतों में बनाया गया। हर परत को पहले डिजिटल मॉडल पर टेस्ट किया गया।
- ब्लॉकचेन डेटा: निर्माण और सुरक्षा की सारी जानकारी ब्लॉकचेन पर सुरक्षित रखी गई।
फायदे
- ज्यादा सुरक्षा – मज़दूरों को खतरनाक जगहों पर कम जाना पड़ा।
- बेहतर क्वालिटी – AI और सेंसर तुरंत ग़लतियाँ पकड़ लेते हैं।
- तेज़ काम – रोबोट दिन-रात काम कर सकते हैं।
- स्मार्ट मॉनिटरिंग – बांध बनने के बाद भी सेंसर और AI से निगरानी आसान रहती है।
चुनौतियाँ
- पूरी तरह मशीनों से नहीं – इंसानी इंजीनियर अब भी ज़रूरी हैं।
- प्रकृति का खतरा – भूकंप और ज़मीन की स्थिति अब भी बड़ी चुनौती हैं।
- पर्यावरण पर असर – हर बांध की तरह, नदियों और गाँवों पर असर पड़ता है।
- साइबर खतरा – कंप्यूटर सिस्टम को हैकिंग से सुरक्षित रखना होगा।
- ज़्यादा खर्च – स्मार्ट तकनीक से काम करना बहुत महँगा पड़ता है।
दुनिया के लिए सबक
दूसरी देश भी AI का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन उन्हें अपने हालात देख कर फैसले लेने होंगे।
नई तकनीक के लिए सरकारों को नए नियम और सुरक्षा मानक बनाने होंगे।
मज़दूरी वाले काम घटेंगे, लेकिन इंजीनियर, AI एक्सपर्ट और रोबोट टेक्नीशियन की मांग बढ़ेगी।
नतीजा
डैशीशिया बांध दिखाता है कि AI और रोबोट से बड़े प्रोजेक्ट तेज़, सुरक्षित और स्मार्ट तरीके से बनाए जा सकते हैं। लेकिन ये कोई जादुई हल नहीं है। पर्यावरण, लागत और इंसानी निगरानी अब भी उतने ही ज़रूरी हैं।
भविष्य में दुनिया के और देशों में भी ऐसे “स्मार्ट डैम” देखने को मिल सकते हैं।
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