Crowd Management and the Role of Law: भारत जैसे घनी आबादी वाले देश में, जहां बड़े पैमाने पर सार्वजनिक समारोह और रैलियां आम हैं, भीड़ प्रबंधन एक महत्वपूर्ण चुनौती है। हाल ही में तमिलनाडु के करूर जिले में अभिनेता-नेता थलपति विजय की राजनीतिक रैली में 40 लोगों की मृत्यु इस विफलता का उदाहरण है। यह घटना बताती है कि प्रभावी योजना, समन्वय और कड़े कानूनी अनुपालन न होने पर सार्वजनिक कार्यक्रम जानलेवा हो सकते हैं।
करूर त्रासदी: एक संक्षिप्त विश्लेषण –
27 सितंबर, 2025 को तमिलनाडु के करूर में तमिलगा वेट्री कझागम (टीवीके) की रैली के दौरान, भीड़ के अनियंत्रित होने के कारण 40 लोगों की मृत्यु हो गई। आयोजकों ने 10,000 लोगों की उपस्थिति का अनुमान लगाया था, लेकिन वास्तविक संख्या 27,000 से अधिक थी। रैली के लिए अपर्याप्त स्थान, पुलिस द्वारा भीड़ नियंत्रण में कमी, और आयोजकों की ओर से उचित प्रबंधन का अभाव इस त्रासदी के प्रमुख कारण थे। देर रात तक थलपति विजय के पहुंचने से भीड़ बेकाबू हो गई, जिसके परिणामस्वरूप दबाव के कारण दम घुटने (compressive asphyxia) से कई लोगों की मृत्यु हुई। यह घटना न केवल आयोजकों की लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि पुलिस प्रशासन की ओर से भीड़ प्रबंधन में कमी को भी उजागर करती है।
यह त्रासदी आयोजकों और प्रशासन—दोनों की संयुक्त लापरवाही को दर्शाती है।
भीड़ प्रबंधन से जुड़े कानूनी प्रावधान
भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023:
धारा 195: लोक सेवक के आदेश की अवहेलना पर दंड
धारा 106(1): लापरवाही से मृत्यु का कारण
धारा 125 : लापरवाही से जीवन या सुरक्षा को ख़तरा
पुलिस अधिनियम, 1861:
पुलिस को भीड़ नियंत्रण और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के अधिकार देता है।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) दिशानिर्देश:
NDMA ने भीड़ प्रबंधन के लिए व्यापक दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिनमें आयोजन स्थल का चयन, भीड़ घनत्व का आकलन, आपातकालीन निकास, और चिकित्सा सुविधाएं शामिल हैं।
आयोजकों को भीड़ की संख्या का सटीक अनुमान लगाना और पर्याप्त सुरक्षा उपाय करना अनिवार्य है।
स्थानीय प्रशासनिक नियम:
राज्य और ज़िला प्रशासन अनुमति प्रक्रिया, सुरक्षा मूल्यांकन और निगरानी के लिए जिम्मेदार होते हैं।
पूर्ववर्ती घटनाएं: चेतावनियाँ जो नजरअंदाज हुईं
2025 , कुम्भ मेला, इलाहाबाद संगम तट भगदड़ से 30 लोगो की मृत्यु ( सरकारी आंकड़े )
2008, चामुंडा देवी मंदिर, जोधपुर: 224 मौतें
2010, सबरीमाला त्रासदी, केरल: 104 लोगों की मृत्यु
हर बार वजह एक ही रही—योजना और समन्वय की कमी।
भविष्य के लिए समाधान
आयोजकों की जिम्मेदारी:
- सही भीड़ अनुमान और उपयुक्त स्थान चयन
- घनी आबादी वाले क्षेत्रों में आयोजन से बचाव
- सेलिब्रिटी आयोजकों का जिम्मेदार व्यवहार
पुलिस और प्रशासन की भूमिका:
- आयोजन स्थल का अग्रिम निरीक्षण
- भीड़ नियंत्रण बल की तैनाती
- आपातकालीन निकासी योजनाएं
कानूनी व नीतिगत सुधार:
- भीड़ प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक समान नीति बनाई जानी चाहिए।
- आयोजकों से जमानत राशि लेने की प्रथा को लागू करना, जैसा कि मद्रास उच्च न्यायालय ने सुझाया, सार्वजनिक संपत्ति की क्षति को रोकने में मदद कर सकता है।
जन जागरूकता:
- जनता को भीड़ में सुरक्षित व्यवहार के बारे में जागरूक करना आवश्यक है।
- सेलिब्रिटी नेताओं को अपनी रैलियों में जिम्मेदारी से व्यवहार करना चाहिए और भीड़ को उकसाने से बचना चाहिए।
करूर त्रासदी एक चेतावनी है कि भीड़ प्रबंधन में लापरवाही घातक हो सकती है। यह आयोजकों, पुलिस, और प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है कि वे ऐसी घटनाओं को रोकें। कानूनी प्रावधानों का सख्ती से पालन, उचित स्थान का चयन, और जन जागरूकता के माध्यम से भविष्य में ऐसी त्रासदियों को टाला जा सकता है। यह समय है कि हम पूर्व की गलतियों से सीखें और एक सुरक्षित और व्यवस्थित समाज की दिशा में कदम उठाएं।
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