स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान: पीएम मोदी का महिलाओं को अनमोल उपहार Healthy Women Empowered Family Campaign

Healthy Women Empowered Family Campaign

भारत जैसे देश में, जहाँ परिवार को समाज की सबसे छोटी इकाई माना जाता है, वहाँ महिलाओं का स्वास्थ्य पूरे समाज के स्वास्थ्य का प्रतिबिंब है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 75वें जन्मदिन पर “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार” अभियान (Healthy Women Empowered Family Campaign) की शुरुआत करके यह संदेश दिया कि स्वस्थ महिला ही सशक्त परिवार और सशक्त राष्ट्र की आधारशिला है।

यह महत्वाकांक्षी पहल स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सहयोग से लागू की जा रही है। इसका लक्ष्य केवल महिलाओं की बीमारियों का इलाज करना नहीं, बल्कि उनके स्वास्थ्य को लेकर समाज की सोच बदलना भी है।

क्यों जरूरी है यह अभियान?

भारत में अब भी मातृ मृत्यु दर (MMR) और एनीमिया के मामले चिंता का विषय बने हुए हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (NFHS-5) के मुताबिक 15-49 आयु वर्ग की लगभग आधी महिलाएँ किसी न किसी रूप में एनीमिया से प्रभावित हैं। इसके साथ-साथ बच्चों में कुपोषण और शिशु मृत्यु दर जैसी समस्याएँ भी विकास में बाधक हैं।
इस अभियान के माध्यम से सरकार ने महिलाओं के लिए नियमित हेल्थ चेक-अप कैंप, पोषण संबंधी जागरूकता, एनीमिया जांच और उपचार जैसी सुविधाएँ सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है।

Healthy Women Empowered Family Campaign

क्या बदल सकता है इस अभियान से?

  • बेहतर स्वास्थ्य, बेहतर परिवार जब महिला स्वस्थ होगी, तो पूरा परिवार स्वस्थ रहेगा और उसकी आर्थिक उत्पादकता भी बढ़ेगी।
  • आर्थिक बोझ में कमी मातृ-शिशु मृत्यु दर घटने से स्वास्थ्य पर होने वाला अतिरिक्त खर्च कम होगा।
  • सशक्तिकरण महिला को केवल घर संभालने वाली नहीं, बल्कि परिवार के स्वास्थ्य और निर्णय-निर्माण की सक्रिय भागीदार के रूप में देखा जाएगा।
  • विकसित भारत की राह यह पहल 2047 तक “विकसित भारत” के लक्ष्य को पाने में मदद करेगी। चुनौतियाँ भी कम नहीं

इतना बड़ा कार्यक्रम जमीन पर उतारना आसान नहीं है। ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य ढाँचा आज भी कमजोर है, प्रशिक्षित डॉक्टर और नर्सों की कमी है। सामाजिक मान्यताएँ और जागरूकता की कमी भी महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँचने से रोकती है। इसके अलावा, बजट और मॉनिटरिंग की पारदर्शिता सुनिश्चित करना भी सरकार के लिए चुनौती होगी।

समाज के लिए संदेश

इस अभियान की खासियत यह है कि यह केवल सरकारी प्रयास नहीं है, बल्कि इसमें समाज की भागीदारी पर भी जोर है। ASHA और ANM जैसी स्वास्थ्य कार्यकर्ता महिलाओं तक सीधे पहुँचेंगी और उन्हें स्वास्थ्य एवं पोषण की अहमियत समझाएँगी। यह पहल “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” जैसे हालिया महिला-सशक्तिकरण प्रयासों के साथ मेल खाती है, जिससे महिलाओं की भूमिका केवल घर तक सीमित न रहकर राष्ट्र निर्माण में भी दिखेगी।

“स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार” एक नीति से बढ़कर एक आंदोलन है। यह हमें याद दिलाता है कि किसी राष्ट्र का भविष्य उसकी माताओं के स्वास्थ्य पर टिका होता है। यदि यह अभियान सही क्रियान्वयन और समाज की भागीदारी के साथ आगे बढ़ता है, तो यह न केवल महिलाओं को स्वस्थ बनाएगा बल्कि भारत को 2047 तक एक विकसित और सशक्त राष्ट्र बनाने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

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