भारत की फ्यूजन ऊर्जा योजनाओं के लिए आईपीआर गांधीनगर का रोडमैप India’s fusion energy plans

India's fusion energy plans

India’s fusion energy plans: भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, गांधीनगर स्थित प्लाज्मा अनुसंधान संस्थान (Institute for Plasma Research – IPR) ने फ्यूजन ऊर्जा के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप प्रस्तुत किया है। यह पहल न केवल भारत को स्वच्छ, सुरक्षित और असीमित ऊर्जा की ओर ले जाएगी, बल्कि सतत विकास (Sustainable Development) के वैश्विक लक्ष्यों की प्राप्ति में भी योगदान करेगी। फ्यूजन ऊर्जा, जो सूर्य और तारों की ऊर्जा का मूल स्रोत है, को भविष्य का सबसे टिकाऊ और दीर्घकालिक ऊर्जा विकल्प माना जा रहा है। इसके माध्यम से भारत को जीवाश्म ईंधनों (Fossil Fuels) पर निर्भरता कम करने, प्रदूषण घटाने तथा ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने का अवसर मिलेगा।

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फ्यूजन ऊर्जा क्या है?

फ्यूजन वह प्रक्रिया है जिसमें दो हल्के परमाणु नाभिक (जैसे हाइड्रोजन के समस्थानिक- ड्यूटेरियम और ट्रिटियम) आपस में मिलकर एक भारी नाभिक का निर्माण करते हैं और प्रचुर मात्रा में ऊर्जा उत्सर्जित करते हैं। यह वही प्रक्रिया है जो सूर्य और तारों के भीतर स्वाभाविक रूप से घटित होती है।

nuclear fusion energy

  • न्यूक्लियर फिशन की तुलना में बहुत कम रेडियोधर्मी कचरा।
  • दीर्घकालिक दृष्टि से सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल।

आईपीआर का रोडमैप : SST-भारत और आगे की दिशा

आईपीआर ने भारत का पहला फ्यूजन आधारित बिजली जनरेटर स्टेडी-स्टेट सुपरकंडक्टिंग टोकामक-भारत (SST-Bharat) प्रस्तावित किया है।

  • ऊर्जा उत्पादन – 130 मेगावाट (100 मेगावाट फिशन + 30 मेगावाट फ्यूजन)
  • क्यू वैल्यू – लक्ष्य Q=5 (यानी इनपुट से 5 गुना अधिक आउटपुट ऊर्जा)।
  • लागत – अनुमानित 25,000 करोड़ रुपये।
  • दीर्घकालिक लक्ष्य – 2060 तक 250 मेगावाट का प्रदर्शन रिएक्टर, Q=20 के साथ, जो व्यावसायिक दृष्टि से व्यवहार्य होगा।
  • भारत फिलहाल ITER परियोजना (फ्रांस) का भी सदस्य है, जो चुंबकीय संनति (Magnetic Confinement) तकनीक पर आधारित एक विशाल अंतरराष्ट्रीय प्रयोग है।

तकनीकी चुनौतियाँ

  • अत्यधिक तापमान – 10 करोड़ °C तक गर्म करना आवश्यक, जबकि सूर्य का केंद्र मात्र 1.5 करोड़ °C है।
  • प्लाज्मा स्थिरता – लंबे समय तक प्लाज्मा नियंत्रित रखना कठिन।
  • भारत का SST-1 टोकामक: 650 मिलीसेकंड तक।
  • फ्रांस का WEST टोकामक: 22 मिनट का रिकॉर्ड (2025)।
    ऊर्जा दक्षता (Q Value) – वर्तमान विश्व रिकॉर्ड मात्र 0.67 (यूके, JET)। व्यावसायिक व्यवहार्यता हेतु Q=20 अपेक्षित।

भारत की रणनीति और नवाचार

  • डिजिटल ट्विन्स – टोकामक के वर्चुअल मॉडल, डिजाइन परीक्षण हेतु।
  • मशीन लर्निंग – प्लाज्मा नियंत्रण व स्थिरता में मदद।
  • नई सामग्रियाँ – विकिरण-प्रतिरोधी एवं उच्च तापमान सहनशील धातुओं का विकास।

वैश्विक परिदृश्य

  • यूके – 2040 तक STEP प्रोटोटाइप संयंत्र।
  • अमेरिका – निजी कंपनियाँ 2030 तक ग्रिड-लिंक्ड रिएक्टर का दावा।
  • चीन – EAST टोकामक ने प्लाज्मा अवधि में रिकॉर्ड बनाए।
  • भारत – 2060 तक का लक्ष्य, अपेक्षाकृत सतर्क लेकिन स्थिर गति।

आर्थिक व नीतिगत चुनौतियाँ

  • फ्यूजन की लागत अन्य स्रोतों (सौर, पवन, फिशन) की तुलना में अधिक।
  • भारत की ऊर्जा नीति (नेट-जीरो 2070) में नवीकरणीय ऊर्जा पर प्राथमिक जोर।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी का अभाव, जबकि अमेरिका-यूरोप में निजी निवेश सक्रिय।

अनुसंधान से होने वाले अन्य लाभ

  • विकिरण-प्रतिरोधी सामग्री – अंतरिक्ष एवं चिकित्सा में उपयोग।
  • सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट्स – स्वास्थ्य और उद्योग में क्रांति।
  • उच्च-तापमान इंजीनियरिंग – तकनीकी आत्मनिर्भरता।
  • ITER सहयोग – वैश्विक प्रबंधन और तकनीकी दक्षता का अनुभव।

आईपीआर गांधीनगर का यह रोडमैप भारत को फ्यूजन ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बनाने की क्षमता रखता है। यद्यपि तकनीकी कठिनाइयाँ, वित्तीय बाधाएँ और नीति संबंधी चुनौतियाँ इसे एक लंबी और जटिल यात्रा बनाती हैं, फिर भी यह पहल भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और स्वच्छ ऊर्जा क्रांति की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।

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