NCRB Report 2023: एक विशाल और विविध भौगोलिक एवं जलवायु वाला देश है, जहाँ प्राकृतिक आपदाएँ और पर्यावरणजनित खतरे आम बात हैं। हाल ही में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 2023 की रिपोर्ट सामने आई, जिसमें इन कारणों से होने वाली मौतों के आँकड़े दिए गए हैं
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की नवीनतम रिपोर्ट ‘ भारत में आकस्मिक मृत्यु और आत्महत्या’ के अनुसार , 2023 में भारत में सबसे अधिक मौतों के लिए बिजली जिम्मेदार थी – 39.7 प्रतिशत या लगभग 2,560 लोग। रिपोर्ट भारत में प्राकृतिक आपदाओं और मानव-वन्यजीव संघर्ष के गंभीर प्रभावों पर प्रकाश डालती है। यह रिपोर्ट नीति निर्माताओं, प्रशासकों और छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है।
- प्राकृतिक कारणों से कुल मौतें: 6,444 (2022 की तुलना में 20% की कमी)
- बिजली गिरने से : 2,560 मौतें
- सांप के काटने से मौतें: 10,144 (2022 की तुलना में 0.6% की वृद्धि)
- पशु हमलों से मौतें: 1,739
प्राकृतिक कारणों से होने वाली मौतें: विश्लेषण
वर्ष 2023 में विभिन्न प्राकृतिक कारणों से कुल 6,444 लोगों की जान गई। इन मौतों के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
- बिजली गिरना (Lightning): यह सबसे बड़ा कारण रहा, जिससे कुल 2,560 मौतें हुईं, जो इस श्रेणी की कुल मौतों का 39.7% है।
- हीट/सन स्ट्रोक (लू): इसके कारण 804 लोगों की मृत्यु हुई। (2022 की तुलना में 10% की वृद्धि)
- ठंड (Cold): ठंड के कारण 733 लोगों की जान गई। (2022 की तुलना में 1.8% की वृद्धि)
- अन्य कारण: बाढ़, भूस्खलन और मूसलाधार बारिश भी मौत के प्रमुख कारण बने रहे।
- आयु वर्ग का प्रभाव: बिजली गिरने से मारे गए लोगों में 63.6% लोग 30-60 वर्ष के आयु वर्ग के थे, जो भारत की कार्यशील जनसंख्या पर इसके प्रभाव को दर्शाता है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष: एक गंभीर चुनौती (NCRB Report)
रिपोर्ट के अनुसार, वन्यजीवों और सरीसृपों के साथ संघर्ष के कारण होने वाली मौतें प्राकृतिक आपदाओं से भी अधिक हैं।
- सांप का काटना (Snakebite): यह एक प्रमुख स्वास्थ्य आपातकाल बना हुआ है, जिससे 10,144 मौतें हुईं।
- जानवरों का हमला (Animal Attacks): बड़े जंगली जानवरों के हमलों में 1,739 लोग मारे गए।
- अन्य जीव-जंतु: सांपों को छोड़कर अन्य सरीसृपों या कीड़ों के काटने से 1,172 लोगों की मृत्यु हुई।
राज्यों का प्रदर्शन और भौगोलिक वितरण
आपदाओं का प्रभाव विभिन्न राज्यों में अलग-अलग रहा
“प्राकृतिक कारणों” से सर्वाधिक मौतें:
- ओडिशा: 1,351
- उत्तर प्रदेश: 852
- मध्य प्रदेश: 789
- बिहार: 679
बिजली गिरने से सर्वाधिक मौतें: - मध्य प्रदेश: 397
- बिहार: 345
- ओडिशा: 294
- हीट स्ट्रोक से सर्वाधिक प्रभावित: तेलंगाना में “प्राकृतिक कारणों” से हुई कुल 137 मौतों में से 85 (62%) हीट स्ट्रोक के कारण हुईं।
- भूस्खलन: जैसा कि अपेक्षित था, भूस्खलन से होने वाली अधिकांश मौतें पहाड़ी राज्यों जैसे मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और मेघालय में दर्ज की गईं।
शहरी क्षेत्रों में आपदा का प्रभाव
देश के 53 प्रमुख शहरों में “प्राकृतिक कारणों” से कुल 602 मौतें हुईं। हीट स्ट्रोक (21.1%) और ठंड (19.6%) शहरी क्षेत्रों में मौत के प्रमुख कारण थे। अमृतसर शहर ठंड (51 मौतें) और हीट स्ट्रोक (56 मौतें) दोनों से होने वाली मौतों में सबसे आगे रहा। इसके बाद लुधियाना और कानपुर का स्थान रहा।
यह NCRB Report दर्शाती है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों (जैसे हीट वेव और ठंड) के साथ-साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष भारत के लिए दोहरी चुनौती है। आपदा प्रबंधन, पूर्व चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने, जन-जागरूकता अभियान चलाने और विशेष रूप से ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में सुरक्षा उपायों को बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है। राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और लक्षित नीतियों के माध्यम से इन आकस्मिक मौतों को कम किया जा सकता है।
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