Nobel Prize | नोबेल से नॉलेज तक: क्यों यह सम्मान आज भी सबसे खास है

Nobel Prize

Nobel Prize: हर साल अक्टूबर की शुरुआत के साथ ही दुनिया भर की नजरें स्टॉकहोम और ओस्लो पर टिक जाती हैं। यह वह समय होता है जब मानवता के लिए असाधारण योगदान देने वाले विद्वानों, वैज्ञानिकों, लेखकों और शांतिदूतों को उनके काम के लिए सर्वोच्च सम्मान, यानी नोबेल पुरस्कार से नवाजा जाता है। यह सिर्फ एक पुरस्कार नहीं, बल्कि मानव प्रतिभा, दृढ़ता और दुनिया को बेहतर बनाने की अटूट इच्छा का एक वैश्विक उत्सव है।

एक ‘मौत के सौदागर’ की वसीयत से जन्मा सम्मान

Nobel Prize की कहानी इसके संस्थापक, स्वीडिश वैज्ञानिक और उद्योगपति अल्फ्रेड नोबेल के जीवन से जुड़ी है। नोबेल ने 355 से अधिक आविष्कार किए, जिनमें डायनामाइट सबसे प्रसिद्ध है। डायनामाइट के आविष्कार ने निर्माण और खनन उद्योग में क्रांति ला दी, लेकिन साथ ही इसका उपयोग युद्ध में विनाश के लिए भी हुआ। इससे नोबेल ने अपार संपत्ति अर्जित की, लेकिन उन्हें ‘मौत का सौदागर’ भी कहा जाने लगा।

कहा जाता है कि 1888 में जब उनके भाई लुडविग की मृत्यु हुई, तो एक फ्रांसीसी अखबार ने गलती से अल्फ्रेड नोबेल के निधन का शोक संदेश छाप दिया, जिसका शीर्षक था- “Le marchand de la mort est mort” (मौत के सौदागर की मौत हो गई है)। यह पढ़कर नोबेल स्तब्ध रह गए। वह नहीं चाहते थे कि दुनिया उन्हें इस तरह याद रखे। इसी घटना ने उन्हें अपनी विरासत को एक नई दिशा देने के लिए प्रेरित किया।

1895 में उन्होंने अपनी अंतिम वसीयत लिखी, जिसमें उन्होंने अपनी संपत्ति का लगभग 94% हिस्सा एक ट्रस्ट के लिए समर्पित कर दिया। उनकी इच्छा थी कि इस पैसे से हर साल उन लोगों को सम्मानित किया जाए जिन्होंने भौतिकी, रसायन विज्ञान, चिकित्सा, साहित्य और शांति के क्षेत्र में “मानव जाति को सबसे बड़ा लाभ” पहुंचाया है। 1901 में पहले नोबेल पुरस्कार प्रदान किए गए। बाद में, 1968 में स्वीडन के केंद्रीय बैंक, स्वेरिजेस रिक्सबैंक ने अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में आर्थिक विज्ञान (Economics) में पुरस्कार की स्थापना की, जिसे आमतौर पर अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार कहा जाता है।

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source- ndtv

चयन प्रक्रिया: दुनिया की सबसे गोपनीय और सख्त कसौटी

Nobel Prize की प्रतिष्ठा इसकी बेहद कठोर और गोपनीय चयन प्रक्रिया में निहित है।

  • कोई स्व-नामांकन नहीं : कोई भी व्यक्ति खुद को इस पुरस्कार के लिए नामांकित नहीं कर सकता।
  • गोपनीयता: नामांकन करने वालों के नाम, नामांकित व्यक्तियों और पुरस्कार पर हुई चर्चा को 50 वर्षों तक गुप्त रखा जाता है।
  • हजारों विशेषज्ञ: हर साल, हजारों योग्य प्रोफेसरों, पूर्व नोबेल पुरस्कार विजेताओं, और विभिन्न अकादमियों के सदस्यों को नामांकन के लिए निमंत्रण भेजे जाते हैं।
  • समय की कसौटी: विशेष रूप से विज्ञान के क्षेत्र में, पुरस्कार अक्सर किसी खोज के दशकों बाद दिया जाता है। समिति यह सुनिश्चित करना चाहती है कि खोज या आविष्कार ने समय की कसौटी पर खरा उतरकर मानवता पर एक स्थायी और सकारात्मक प्रभाव डाला है।
  • शांति पुरस्कार का अपवाद: केवल शांति पुरस्कार ही ऐसा है जो अक्सर हाल की उपलब्धियों को मान्यता देता है, ताकि मौजूदा वैश्विक संकटों पर ध्यान केंद्रित किया जा सके।

पुरस्कार में क्या मिलता है?

प्रत्येक नोबेल पुरस्कार विजेता को तीन चीजें मिलती हैं:

  • एक नोबेल डिप्लोमा : यह अपने आप में कला का एक अनूठा काम होता है, जिसे स्वीडिश और नॉर्वेजियन संस्थानों द्वारा विजेताओं के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया जाता है।
  • एक नोबेल पदक: यह 18 कैरेट सोने का बना होता है और इस पर अल्फ्रेड नोबेल की छवि अंकित होती है।
  • पुरस्कार राशि: यह राशि नोबेल फाउंडेशन की आय पर निर्भर करती है। वर्तमान में यह 11 मिलियन स्वीडिश क्रोनर (लगभग 10 करोड़ रुपये से अधिक) है। यदि एक पुरस्कार में दो या तीन विजेता होते हैं, तो यह राशि उनके बीच विभाजित की जाती है। किसी एक श्रेणी में, यह पुरस्कार अधिकतम तीन विजेताओं को संयुक्त रूप से प्रदान किया जा सकता है।

भारत के नोबेल सितारे

भारत या भारतीय मूल के कई दिग्गजों ने इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को जीता है:

  • रवींद्रनाथ टैगोर (साहित्य, 1913)
  • सी. वी. रमन (भौतिकी, 1930)
  • हर गोबिंद खुराना (चिकित्सा, 1968)
  • मदर टेरेसा (शांति, 1979)
  • सुब्रह्मण्यन् चंद्रशेखर (भौतिकी, 1983)
  • अमर्त्य सेन (अर्थशास्त्र, 1998)
  • वेंकटरमन रामकृष्णन (रसायन विज्ञान, 2009)
  • कैलाश सत्यार्थी (शांति, 2014)
  • अभिजीत बनर्जी (अर्थशास्त्र, 2019)

अल्फ्रेड नोबेल की अपनी छवि बदलने की एक व्यक्तिगत इच्छा से शुरू हुआ यह सफर आज ज्ञान और मानवता की सेवा का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुका है। यह पुरस्कार हमें याद दिलाता है कि विचार, खोज और करुणा में दुनिया को बदलने की शक्ति है। यह सिर्फ विजेताओं का सम्मान नहीं है, बल्कि यह भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा स्रोत है कि वे भी मानवता की भलाई के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दें। इसीलिए, एक सदी से भी अधिक समय के बाद, नोबेल आज भी दुनिया का सबसे खास और प्रतिष्ठित सम्मान बना हुआ है।

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